Tuesday, September 6, 2016

3 ...........

एक पुरानी,
भूली
भटकी
शर्द सी
प्यार की जरूरत पड़ती है
कवितायेँ लिखने के लिए

वो लमहा जब दिमाग
काम ना करे
और
दिल एक खामोस से
अहसास में खोया रहे

जब सब चुप हो,
उदास हो, रात हो,
सितारों से बात हो,
ताजमहल के किनारे
वो यमुना बहती रहे,
हम तुम बैठे रहें ,
शर्द हवा चलती रहे,
लम्हा जैसे थम सी जाये,
साँस जैसे रूक सी जाये

वो मिलन ही तो मिलन है जब
हम तुम ना रहे
बस एक एहसास रहे.

हमारे तुमहारे सबके दिलों में
वो प्यार जिन्दा रहे

कवितायेँ तभी मुस्कराती है

अँधेरी रातों में भी
सितारों सी चमक सी जाती है

Tuesday, October 6, 2015

 2  ...........

एक  लंबी सी नींद के पहले
बची है
बस थोड़ी सी जिंदगी,

वो जिंदगी
जिसमे सपने भरे हैं
अपनो के,

कोई रूठ जाए
तो सोचता हूँ
मना लूँ उसको
उस लंबी सी
नींद के पहले
जो आ सकती है
कभी भी
बगैर कोई दस्तक दिए !

Wednesday, April 2, 2014

1 ......

अब हम किसको कहें तो कैसे
कैसे कैसे पल बदला
हम तुम बदले

क्या था बुरा
वो जीवन अपना
छोटी आँखें और
छोटा सपना

जीवन का वो
आवर्त भला था
छोटा था पर
कुछ अच्छा गहरा था

क्या अच्छा था
जब अंधियारा था
उस रात की गर
सुबह ना होती
हम तुम अब भी 
सुबह को  तकते
इस उजियारे से
मेरी  मानो  तो
उस उजियारे
का
भरम भला था